
बेंगलूरु। पिछले 11 साल से सहारा से सहारा लेने वाली टीम इंडिया बेसहारा हो गई है। आईपीएल5 के लिए खिलाडि़यों की नीलामी से कुछ देर पहले सहारा ने टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप छोड़ दी। इसके साथ ही सहारा ने पुणे वरियर्स की भी ओनरशिप छोड़ दी है। अपने इस फैसले के पीछे सहारा ने आईपीएल की नीलामी में बीसीसीआई की मनमानी का आरोप लगाया है।
सहारा और बीसीसीआई के बीच युवराज सिंह को लेकर तकरार शुरू हुई। फिट न होने की वजह से पुणे वरियर्स के कप्तान युवराज सिंह आईपीएल5 में नहीं खेल रहे हैं। जिसकी जगह पर पुणे वरियर्स ने उनकी जगह किसी दूसरे खिलाड़ी की मांग की थी। सहारा का कहना है कि जितना पैसा वे युवराज सिंह को दे रहे हैं उतना अधिक पैसा उन्हें आईपीएल की नीलामी में लगाने को अधिक मिले।
बीसीसीआई ने नियमों का हवाला देते हुए सहारा की यह मांग ठुकरा दी। इसके बाद सहारा और बीसीसीआई में विवाद पैदा हो गया। सहारा ने बीसीसीआई पर नियमों के साथ मनमानी करने और कुछ टीमों को ज्यादा तवज्जो देने का आरोप भी लगाया। जिसके बाद सहारा ने पुणे वारियर्स की ओनरशिप छोड़ने का फैसला किया।
युवराज मामले के अलावा सहारा ने टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप और पुणे वारियर्स की ओनरशिप छोड़ने के पीछे और भी कई बड़े कारण दिए। सहारा ने कहा कि भारत में खेले गए विश्वकप के दौरान भी बीसीसीआई ने खिलाडि़यों के कपड़ों पर सहारा के लोगो का इस्तेमाल नहीं किया गया। सहारा ने कहा कि इसके लिए उन्होंने बीसीसीआई को पेमेंट किया था।
सहारा ने कहा कि आईपीएल4 में 94 की जगह केवल 74 मैच खेले गए जिसकी वजह से उनकी कंपनी को खासा नुकसान हुआ है। इसके अलावा सहारा ने यह भी आरोप लगाया कि 2008 में बोली नहीं खोली गई। बीसीसीआई ने तकनीकी आधार पर उनकी बोली खारिज कर दी।
सहारा का बीसीसीआई के साथ 31 दिसंबर 2013 तक करार था। इस करार के तहत सहारा हर एक टेस्ट, वनडे और टी20 मैच के लिए 3.34 करोड़ रुपए देता था। टीम इंडिया इस सयम ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय सीरीज खेल रही है। टूर्नामेंट के बीच ही सहारा ने टीम की स्पॉन्सरशिप छोड़ दी है। पुणे वारियर्स आईपीएल से अलग होने वाली दूसरी टीम है। इससे पहले कोच्चि टस्कर्स की टीम भी आईपीएल से बाहर हो गई थी।
सहारा और बीसीसीआई के बीच युवराज सिंह को लेकर तकरार शुरू हुई। फिट न होने की वजह से पुणे वरियर्स के कप्तान युवराज सिंह आईपीएल5 में नहीं खेल रहे हैं। जिसकी जगह पर पुणे वरियर्स ने उनकी जगह किसी दूसरे खिलाड़ी की मांग की थी। सहारा का कहना है कि जितना पैसा वे युवराज सिंह को दे रहे हैं उतना अधिक पैसा उन्हें आईपीएल की नीलामी में लगाने को अधिक मिले।
बीसीसीआई ने नियमों का हवाला देते हुए सहारा की यह मांग ठुकरा दी। इसके बाद सहारा और बीसीसीआई में विवाद पैदा हो गया। सहारा ने बीसीसीआई पर नियमों के साथ मनमानी करने और कुछ टीमों को ज्यादा तवज्जो देने का आरोप भी लगाया। जिसके बाद सहारा ने पुणे वारियर्स की ओनरशिप छोड़ने का फैसला किया।
युवराज मामले के अलावा सहारा ने टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप और पुणे वारियर्स की ओनरशिप छोड़ने के पीछे और भी कई बड़े कारण दिए। सहारा ने कहा कि भारत में खेले गए विश्वकप के दौरान भी बीसीसीआई ने खिलाडि़यों के कपड़ों पर सहारा के लोगो का इस्तेमाल नहीं किया गया। सहारा ने कहा कि इसके लिए उन्होंने बीसीसीआई को पेमेंट किया था।
सहारा ने कहा कि आईपीएल4 में 94 की जगह केवल 74 मैच खेले गए जिसकी वजह से उनकी कंपनी को खासा नुकसान हुआ है। इसके अलावा सहारा ने यह भी आरोप लगाया कि 2008 में बोली नहीं खोली गई। बीसीसीआई ने तकनीकी आधार पर उनकी बोली खारिज कर दी।
सहारा का बीसीसीआई के साथ 31 दिसंबर 2013 तक करार था। इस करार के तहत सहारा हर एक टेस्ट, वनडे और टी20 मैच के लिए 3.34 करोड़ रुपए देता था। टीम इंडिया इस सयम ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय सीरीज खेल रही है। टूर्नामेंट के बीच ही सहारा ने टीम की स्पॉन्सरशिप छोड़ दी है। पुणे वारियर्स आईपीएल से अलग होने वाली दूसरी टीम है। इससे पहले कोच्चि टस्कर्स की टीम भी आईपीएल से बाहर हो गई थी।













