Englishಕನ್ನಡമലയാളംதமிழ்తెలుగు

अच्छी ही नहीं चालाक भी है भारतीय टीम

Written by: नवीन निगम
     Published: Friday, June 21, 2013, 18:14 [IST]
 

भारतीय क्रिकेट टीम का विजय अभियान जारी है। हर क्रिकेट प्रेमी खुश दिखाई पड़ रहा हैं। कुछ लोग इसे शेखर धवन की बल्लेबाजी का चमत्कार बता रहे है तो कुछ फील्डिंग और गेंदबाजी को इसका श्रेय दे रहे हैं। यह ठीक भी हैं। शेखर धवन की बल्लेबाजी बेजोड़ हैं और भारत की सफलता में उनका बड़ा हाथ हैं। लेकिन लगातार विजय अभियान में अगर कोई बात सबसे ज्यादा उभर कर सामने आई है तो वह है भारतीय टीम की रणनीति और दूसरी टीमों पर मानसिक दबाव बनाना।

छह जून को भारत का पहला मैच दक्षिण अफ्रीका से था भारत ने पहले खेलते हुए सात विकेट पर 331 रन बनाए संयोग से जैसे भारत खेल रहा था उस हिसाब से उसने 25 से 30 रन कम ही बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका 305 रन ही बना सका। इस मैच के बाद भारत ने अगला मैच जो 11 जून को वेस्टइंडीज के साथ खेला तब तक जो लीग मैच हुए उसमें कोई भी टीम 300 का आकड़ा नहीं छू सकी। सारी टीमों पर एक मानसिक दबाव बन गया कि भारत की बल्लेबाजी में इतनी ताकत है कि वह बड़ी आसानी से 300 से ऊपर का स्कोर बना सकते हैं। इसके बाद भारत ने अन्य टीमों द्वारा भारत के बारे में पाली कई धारणा को अपनी रमनीति में बदल लिया दूसरे मैच में भारत ने पहले गेंदबाजी करने की बात कही। पहले वेस्टइंडीज को खिलाया। क्रिस गेल का बल्ला चल निकला था लगा आज वेस्टइंडीज बड़ा स्कोर बनाएगा।

अच्छी ही नहीं चालाक भी है भारतीय टीम

लेकिन गेल के आउट होने के बाद वेस्टइंडीज की टीम भारत को 300 से ज्यादा का स्कोर देने के चक्कर में सिर्फ 233 रन ही बना सकी। यानी भारत को 50 ओवर के मैच में पांच के औसत से भी कम रन बनाने थे। भारत ने स्कोर का पीछा आराम से विकेट बचाते हुए किया। बल्लेबाजों ने हड़बड़ी नहीं दिखाई वो एक-एक रन पर अपना सारा ध्यान लगाए रहे। जब एक दो रन के सहारे टीम आगे बढ़ती रही तो थोड़ी देर बाद इंडीज के गेंदबाजों का मनोबल टूट गया और उनकी लय टूट गई अब भारतीय बल्लेबाजों ने टूटी लय से गेंदबाजी कर रहे इंडीज के गेंदबाजो की बीच-बीच में धुनाई भी कर दी।

यानी बिना ज्यादा मेहनत किए सिर्फ मानसिक दबाव ने पहले इंडीज को बड़ा स्कोर बनाने के चक्कर में 233 के अंदर समेट लिया और बाद में धीमे धीमे बल्लेबाजी करके इंडीज के साथ ही साथ अन्य टीमों को यह बतला दिया कि स्कोर कम होने की वजह से हम ऐसा खेल रहे है नहीं तो इतना कम स्कोर भारतीय टीम के लिए कुछ नहीं हैं और बाद में तेजी से फिनिश करके 65 गेंद पहले ही 8 विकेट से जीत दर्ज की।

इस विजय के बाद विरोधी टीमों में भारतीय बल्लेबाजी का लोहा बैठ गया और टीमों को यकीन हो गया कि 300 से कम स्कोर पर भारत से जीतना संभव ही नहीं है। धोनी ने यही से अपनी इस रणनीति को और पुख्ता किया। पाक से जब मैच में भारत के लिए कोई चुनाती नहीं बची थी तब भी धोनी ने इसी रणनीति के तहत पाक को पहले खेलने के लिए बुलाया। जबकि पाक भारत के मैच में आज तक होता यही रहा है कि जो टांस जीतता है वह पहले बल्लेबाजी करता हैं। पाक के साथ भी वहीं हुआ बड़ा स्कोर खड़ा करने के चक्कर में वह फंस गए शुरुआती विकेट गंवाने के बाद वह कम ही स्कोर बना सके पूरे मैच में एक बार भी ऐसा नही लगा कि पाक भारत को हरा सकता है। बारिश से धुल चुके इस मैच को भी भारत ने कई बार चैलेंज बढऩे के बाद भी बड़ी आसानी से 8 विकेट से जीत लिया।

अब तक रणनीति चल निकली थी श्रीलंका भी भारत की इसी रणनीति का शिकार हुआ विकेट बचाकर चलने वाला श्रीलंका शुरू में धीमा हुआ और उसके बाद बड़ा स्कोर खड़ा करने के चक्कर में कभी भी संभल नहीं पाया। क्योंकि वह भी भारत को 300 से ऊपर का स्कोर देना चाहता था भारत ने भी श्रीलंका के ऊपर इस मानसिक दबाव का फायदा उठाया और उसे 50 ओवर खेलने के बावजूद 181 पर सीमित कर दिया जबकि पिच अच्छा खेल रही थी। लेकिन भारत ने फिर वही रणनीति अपनाई पहले धीरे धीरे खेल को विकेट बचाते हुए आगे बढ़ाया शेखर धवन जैसे बल्लेबाज ने भी कभी शॉट खेलने में जल्दबाजी नहीं दिखाई 15 ओवर का मैच होने के बाद ही श्रीलंका के हाथ से मैच निकल गया।

कमजोर पड़ रही गेंदबाजी पर तब भी भारत के बल्लेबाजों ने आक्रमण नहीं किया पहले वह बड़ी जीत को सुनिश्चित कर लेना चाहते थे इसी को देखते हुए 75 रन रहने पर भी खुलकर शाटॅ नहीं खेल रहे थे क्योंकि वो श्रीलंका से तो जान ही रहे थे कि जीत चुके है लेकिन वह इंगलैंड की टीम को वहीं संदेश देना चाहते जो अब तक बाकी टीमों को देकर जीतते चले आ रहे थे और यह तय है कि भारत ने इंग्लैंड को जो संदेश दिया है उसके बाद इंग्लैंड ने भी यदि पहले बल्लेबाजी की तो वह भी भारत की 300 से ज्यादा का स्कोर खड़ा करने की रणनीति का शिकार हो सकता है।

क्योंकि भारत की गेंदबाजी अव्वल नहीं तो औसत दर्जे की है और यह 300 से बड़ा स्कोर करने के चक्कर में आने वाली टीम को ले बैठती है। पूरे टूर्नामेंट में भारत की यही रणनीति बड़ी कामयाब रही है और धोनी कहीं टांस जीत गया तो निश्चित है कि भारत की यह रणनीति इंग्लैंड के खिलाफ भी कामयाब रहेंगी।

English summary
The performance shown by Team India in Champions Trophy is the best in last two years.
कमेंट लिखें